इसमें कोई शक नहीं कि विराट कोहली काफी प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। यह बाद सभी जानते हैं कि जब वह टीम में रहते हैं तो विपक्षी टीम पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव रहता है। इसीलिए विराट की अहमियत से कोई इंकार नहीं कर सकता है, लेकिन इधर कुछ सालों से विराट जिस तरह से खेल रहे हैं उस पर अंगुली उठना लाजिमी है। पिछले करीब तीन साल से विराट ने टीम इंडिया को बतौर खिलाड़ी कुछ नहीं दिया है। जब भी विराट से उम्मीद की जाती है तो फेल साबित हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि क्या वाकई विराट टीम इंडिया के लिए बोझ बन गए हैं।

कोहली ने हमेशा कहा करते हैं कि वे खुद को बेस्ट मानकर क्रिकेट खेलते हैं। अपनी परफॉर्मेंस से उन्होंने लंबे समय तक खुद को बेस्ट साबित भी किया है, लेकिन 23 नवंबर 2019 विराट के आखिरी शतक की तारीख है। उसके बाद से उनका प्रदर्शन देखिए। 18 टेस्ट मैचों में 27.25 की औसत से सिर्फ 872 रन। शतक एक भी नहीं। बेस्ट होना तो छोड़िए, वे इस दौरान दुनियाभर में सबसे ज्यादा टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में टॉप 30 में भी नहीं हैं। वे इस लिस्ट में 34वें नंबर पर हैं। सिर्फ भारतीय बल्लेबाजों की बात करें तो भी विराट का नंबर चौथा है।
ऐसे प्रदर्शन के बावजूद विराट कोहली ढोए जा रहे हैं। सवाल यह भी है कि अगर विराट खुद कप्तान होते तो क्या वे इतना साधारण खेल दिखाने वाले बल्लेबाज को प्लेइंग.11 में शामिल करते। जाहिर है, इसका जवाब विराट तो देने नहीं जा रहे, लेकिन बतौर कप्तान उनके फैसले बहुत कुछ बयान करते हैं।
विराट कोहली खिलाड़ियों को ड्रॉप करने और प्लेइंग.11 में बदलाव करने में माहिर कप्तान माने जाते थे। उन्होंने 68 टेस्ट मैचों में टीम इंडिया की कमान संभाली और 64 में उन्होंने प्लेइंग11 में बदलाव किए। उनकी कप्तानी में 41 खिलाड़ियों ने टेस्ट मैच खेला। इनमें से चार को सिर्फ 1-1 टेस्ट में मौका दिया गया। पांच खिलाड़ी 2-2 टेस्ट ही खेल पाए। 9 खिलाड़ी ऐसे रहे जिन्हें सिर्फ 3 से 5 टेस्ट में ही चांस मिला। कप्तान विराट हर बदलाव के पीछे टीम हित का तर्क देते थे। क्या यह तर्क अब बल्लेबाज विराट पर लागू होगा।
विराट के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यह साफ हो जाता है कि बतौर बल्लेबाज उनका बेस्ट तभी सामने आया, जब वे टीम के कप्तान थे। कप्तान के तौर पर उन्होंने 68 टेस्ट की 113 पारियों में 54.80 की औसत से 5864 रन बना दिए। दूसरी ओर बगैर कप्तानी सिर्फ खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने अब तक 34 टेस्ट खेले हैं और 60 पारियों में 39.46 की औसत से महज 2210 रन बना पाए हैं। शतक भी सिर्फ सात। तो क्या विराट तभी रन बनाएंगे, जब उन्हें फिर से कप्तान बना दिया जाए। जाहिर सी बात है इन सवालों के बारे में विराट को सोचना पड़ेगा। क्योंकि अभी हाल ही हुए इंग्लैंड में एकमात्र टेस्ट में विराट से काफी उम्मीदंें थीं, लेकिन वह दोनों पारियों में फेल रहे। जिससे अब उनके प्रदर्शन पर अंगुलियां उठने लगी हैं।
