सहारनपुर। काजी परिवार से इमरान मसूद के सपा में शामिल होने के बाद गंगोह सीट पर बसपा से चुनाव लड़ने जा रहे नोमान मसूद ने 2017 में कांग्रेस के टिकट पर गंगोह से चुनाव लड़ा था। तब नोमान करीब 38 हजार वोटों के अंतर से भाजपा के प्रदीप चौधरी से हार गए थे।
पहले प्रदीप के पिता मास्टर कंवर पाल और फिर प्रदीप को काजी परिवार ने ही इस सीट पर चुनाव लड़ाकर निर्दलीय भी विधायक बनवाया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से प्रदीप चौधरी कैराना सीट से सांसद निर्वाचित हुए तो यह विस सीट खाली हो गई और उसी साल हुए उपचुनाव में नोमान ने फिर कांग्रेस से किस्मत आजमाई, लेकिन इस बार भाजपा के कीरत सिंह से करीब 5 हजार वोटों के अंतर से हार गए।
दरअसल, सोमवार को गंगोह के पूर्व चेयरमैन नोमान मसूद ने बसपा के पश्चिमी उतर प्रदेश प्रभारी नेता शमसूदीन राईन के गाजियाबाद स्थित आवास पर अपने पुत्र हमजा मसूद, पूर्व जिला पंचायत सदस्य संदीप वर्मा रंधेडी व पूर्व प्रधान महबूब खानपुर के साथ बसपा की नीतियों में विश्वास जताते हुए पार्टी में शामिल होने की घोषणा की थी।
अभी चार माह पहले ही नोमान मसूद कांग्रेस को छोड़कर रालोद में आये थे। उन्हें उम्मीद थी कि रालोद उनको गंगोह से टिकट देगी, लेकिन सपा रालोद गठबंधन में यह सीट सपा के पाले में जाती दिख रही है, ऐसे ने नोमान ने रालोद छोड़कर बसपा का हाथ थाम लिया। बुधवार को उन्होंने मायावती से मुलाकात की और बसपा से गंगोह के लिए टिकट की दावेदारी भी कर दी। उनका टिकट कन्फ़र्म करते हुए मायावती ने इसका ट्वीट भी कर दिया है।
