शामली। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभावी होने से शनिवार की देर रात से रविवार दोपहर ढाई बजे तक बारिश हुई। करीब 18 घंटे में 38 एमएम बारिश रिकार्ड की गई। झमाझम बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। शहर के कलक्ट्रेट व सरकारी कार्यालय समेत कई स्थानों पर जलभराव के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
पिछले चार दिन से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार रात दस बजे से फिर शुरू हुई बारिश रविवार की दोपहर ढाई बजे तक जारी रही। शहर के करनाल रोड स्थित आरके पीजी कॉलेज, कोतवाली शामली, कलक्ट्रेट परिसर, विजय चौक, फव्वारा चौक, बड़ा बाजार, गोशाला रोड, माजरा रोड, टंकी रोड, रेलपार, ब्लॉक रोड मोहल्ला पंसारियान, किरोड़ी रोड, गोहरनी, शामली अंडरपास समेत अन्य इलाकों में जलभराव होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के चलते दिन का तापमान एक डिग्री और रात का तापमान तीन डिग्री लुढ़क गया। छह किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने मौसम में ठिठुरन बढ़ गई।
दिन का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पूर्वी यमुना नहर खंड शामली के उपराजस्व अधिकारी अंबुज चौधरी ने बताया कि शनिवार की देर रात से लेकर रविवार ढाई बजे तक 38 एमएम बारिश रिकार्ड दर्ज की गई है। गत छह जनवरी से लेकर नौ जनवरी तक 90 एमएम बारिश हुई है।
अभी चार दिन और खराब रहेगा मौसम
करीब 18 घंटे की बारिश के बाद दोपहर करीब तीन बजे थोड़ी देर के लिए हल्की धूप निकली। कुछ देर बाद आकाश में फिर से बादल छा गए। शाम के समय मौसम में ठिठुरन जारी रही। छोटे बच्चे स्कूल का अवकाश होने के चलते गर्म कपड़ों में दुबके रहे। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि पटेल के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के नोडल अधिकारी डॉ. यूपी शाही ने बताया कि दस जनवरी से लेकर 13 जनवरी तक मौसम मिश्रित रहने की संभावना है। अगले तीन दिन आकाश में हल्के बादल रहेंगे और धूप निकलेगी। बुधवार के बाद मौसम साफ होगा।
किसानों को फसल खराब होने की चिंता
बारिश के चलते किसानों को फसलों के खराब होने का डर सताने लगा है। गन्ने की फसल के लिए जहां यह बारिश अच्छी मानी जा रही है। ज्यादा बारिश के चलते गेहूं की पिछेती फसल व आलू के अलावा अन्य सब्जियों की फसल खराब होने की आशंका है। बारिश के साथ तेज हवा चलने से सरसों की फसल भी खेतों में गिर गई। जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। इस बार पिछले वर्षों से अधिक रकबे में किसानों ने सरसों की फसल की बुवाई की थी।
