बागपत। बदमाशों ने सोमवार को जिले के बसी गांव में खेत से गन्ना लेकर लौट रहे दादा पौते की गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देकर आरोपी फरार हो गए।
खेकड़ा क्षेत्र के बसी गांव में दिनदहाड़े दादा पोते को गोलियों से भून दिया गया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई । मामला पुरानी रंजिश का बताया जा रहा है।
मृतक बसी गांव के ही रहने वाले किसान सतसिह (80) और उनका पोता मंदीप (20) हैं। दोनों सोमवार की सुबह ट्रैक्टर- ट्रॉली लेकर खेतों पर गन्ना लेने गए थे। वहां से वापस लौटते समय बसी महरमपुर मार्ग पर उन पर अज्ञात बदमाशों ने गोलियां बरसा दीं। सूचना मिलते ही पुलिस में हड़कंप मच गया । सीओ युवराज सिंह और कोतवाली प्रभारी देवेश शर्मा तुरंत ही पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए । वहां उन्हें घटनास्थल पर 15 खोखा कारतूस मिले । पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में ले लिया है । शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिए।
पुलिस के अनुसार प्राथमिक दृष्टया जांच में हत्या का कारण पुरानी रंजीश सामने आया है।सतसिंह के पुत्र ऋषिपाल की दो साल पहले जिला जेल में काठा के एक बदमाश ने कट्टन से हत्या कर दी थी। बसी के जमानत पर चल रहे एक बदमाश पर पुलिस की शक की सूई घूम रही है।
पुरानी रंजिश में उजड़ गया सत सिंह का परिवार
बागपत। बसी गांव में रंजिश के कारण सतसिंह का पूरा परिवार ही उजड़ गया। जहां पहले उसके बेटे ऋषिपाल की जेल में हत्या हो गई थी और उसके बाद सतसिंह व पोता ही परिवार चलाते थे। लेकिन अब उन दोनों की हत्या होने से परिवार का गुजारा करने वाला भी नहीं बचा है। वहीं दोनों की हत्या की सूचना ऋषिपाल की पत्नी को दी गई तो वह देर रात तक यहां पहुंची और उसने मुकदमा दर्ज कराया।
बसी गांव में सतसिंह बड़े किसान थे। उनके पास करीब 70 बीघा कृषि भूमि है। सतसिंह की उनके ही चचेरे भाई व पूर्व ओमपाल से वर्चस्व की जंग शुरू हो गई और उनके बीच रंजिश बढ़ती चली गई। उस रंजिश में अप्रैल 2020 मे इन दोनों परिवारों के बीच संघर्ष हुआ था।
जिसमें दोनों तरफ से लाइसेंसी हथियारों से फायर भी किए गए थे। इस मामले में सतसिंह और ऋषिपाल जेल गए थे। वहीं, दो मई 2020 को ऋषिपाल की हत्या कर दी गई थी। उसकी हत्या जेल में बंद काठा गांव के बदमाशों ने कट्टन से हमला करके की थी। उसके बाद से सतसिंह व पोता मनदीप ही खेती संभालते थे।
ये दोनों परिवार का गुजारा करते थे। अब रंजिश में उन दोनों की भी हत्या कर दी गई। इनका खून भी अपनों ने बहाया। इस तरह अपनों से रंजिश के कारण पूरा परिवार ही उजड़ गया। सीओ युवराज सिंह का कहना है कि सतसिंह और पोते मनदीप की हत्या में शामिल आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीमें लगी हुई हैं। आरोपियों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।
बेटे की पत्नी छोड़ गई थी गांव
सतसिंह का कुछ वर्षों पहले तक भरा पूरा परिवार था। उनके ऋषिपाल और आनंद दो पुत्र थे। आनंद की करीब बीस वर्ष पहले संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इसके बाद ऋषिपाल की शादी हुई थी। ऋषिपाल के दो पुत्र और एक पुत्री हैं। जिला जेल मे ऋषिपाल की हत्या के बाद उसकी पत्नी गांव छोड़ गई थी। वह अपने साथ एक पुत्र और पुत्री को भी ले गई थी। तभी से वह मुजफ्फरनगर में रह रहे हैं। यहां गांव में सतसिंह और उनका पोता मनदीप ही रहते थे। सोमवार को उन्हें मौत के घाट उतार दिया।
दोनों पर अंधाधुंध बरसाईं गोलियां
सतसिंह और उसके पौत्र पर चलते ट्रैक्टर पर ही बदमाशों ने अंधाधुंध गोलिया बरसाईं। इससे दोनों के खून से लथपथ शव ट्रैक्टर पर ही पड़े रहे। सीओ युवराज सिंह ने बताया कि दोनों को करीब पंद्रह-बीस गोलियां मारी गई हैं। जिनमें से पंद्रह खोखे मौके से बरामद हुए हैं। यह माना जा रहा है कि गोलियां पिस्टल से चलाई गई हैं। सुरक्षा की दृष्टि से गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है।
