देहरादून/हरिद्वार। दून घाटी सूर्य उपासना के लोक पर्व छठ पूजा के रंग में रंगी है। छठ का व्रत रखने वाली महिलाओं ने अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया और विधि-विधान से पूजा कर छठ मैया से घर-परिवार और सभी के कल्याण की कामना की। इस अवसर पर चारों ओर पहिले पहिल छठी मइया…, सुनि लेहु अरज हमार हे छठी मइया…, सेईं ले चरण तोहार ऐ छठी मइया, कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकति…जैसे पारंपरिक गीत गूंजते रहे। हर घाट पर उत्सव और आस्था का माहौल दिखाई दिया। बृहस्पतिवार को उगते सूर्य को नमन कर अर्घ्य देने के साथ ही इस चार दिवसीय छठ व्रत का समापन हो गया। उधर छठ पर हरिद्वार में भी हर की पैड़ी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही।

छठ पर्व के तीसरे दिन यानी बुधवार को श्रद्धालुओं ने विभिन्न तरह के पकवान, कंद मूल और फल के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान कोरोना वायरस के खात्मे और प्रदेश की खुशहाली की कामना की गई। सोमवार को नहाय खाय और मंगलवार को खरना के बाद बुधवार को आखिर वह दिन आया, जिसका सभी छठ व्रतियों को इंतजार था। यह था ॠहते जल के प्राकृतिक स्रोतों में खड़ा होकर अस्ताचलगामी यानी ढलते सूर्य को अर्घ्य दिया। इसे लेकर शहर के विभिन्न छठ घाटों को पहले ही सजाया जा चुका था और वहां बिजली-पानी समेत अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई।

कुछ स्थानों पर नगर निगम और जिला प्रशासन ने छठ व्रतियों के लिए कुछ सुविधाएं दी तो कुछ स्थानों पर श्रद्धालुओं ने अपने निजी योगदान से छठ घाटों की सफाई और अन्य जरूरी कार्य किए। इसी क्रम में पाटलिपुत्र विचार मंच के सदस्यों अशोक पंडित, संदीप प्रजापति, अनिल प्रजापति, पप्पू कुमार, दिलीप पंडित, शैलेंद्र, शैलेश, सागर डिमरी, सतवीर, पूरन चंद, गणेश, रमेश, प्रदीप आदि ने मालदेवता रोड रायपुर, नत्थनपुर, मोहिनी रोड, पुलिया नंबर छह, हरबंश वाला और हरिपुर कलां, चंद्रबनी में सफाई और अन्य कार्यों की जिम्मेदारी निभाई।

बुधवार को चार बजते ही मंच से जुड़े सभी श्रद्धालुओं अपने-अपने वाहनों से छठ घाट पर पहुंचे। छठ व्रतियों ने पानी में खड़ा होकर भगवान सूर्यदेव को दूध व अन्य पकवान सा अर्घ्य दिया। सायं साढ़े पांच बजे के करीब अर्घ्य देने और उसके बाद आरती करने के बाद सभी व्रती अपने-अपने घरों को लौट गए।
बृहस्पतिवार को भोर होने से पहले ही 3 बजे ही लोग पूजन सामग्री लेकर घाटों की तरफ जाने लगे। घाटों पर पहुंचकर पूजा पाठ शुरू की। लाउडस्पीकर ऊपर छठ मैया के गीत बजने लगे। आतिशबाजी होने लगी। जिससे वहां उत्सव सा माहौल रहा। सुबह सूर्य उदय होने तक उत्सव सा माहौल रहा। सूर्योदय होने पर बेटी महिलाओं ने भगवान भास्कर को आरके दिया और पूजन कर व्रत का समापन किया। उसके बाद सभी लोग छठ घाटों से अपने घरों को लौट गए।
