गोंडा। एलबीएस कॉलेज में 09 सितंबर को भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती पर आयोजित संगोष्ठी के मुख्य वक्ता हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर शैलेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी के उन्नायक, युगांतरकारी व्यक्तित्व एवं प्रसिद्ध साहित्यकार थे।
उन्होंने हिंदी साहित्य में रीतिकालीन परिपाटी को तोड़ते हुए अपने समय और समाज की हर महत्वपूर्ण समस्याओं से साहित्य को जोड़ा। साहित्य की कई महत्वपूर्ण विधाओं की शुरुआत उन्होंने की। नाटक, निबंध सहित कई गद्य विधाएं भारतेंदु की लेखनी से समृद्ध हुईं। पराधीन भारत की दुरवस्था से भारतेंदु जी अत्यंत व्यथित थे। उन्होंने एक सजग साहित्यकार और पत्रकार के रूप में समस्याओं को चिह्नित कर पाठकों के सम्मुख रखा।
इस अवसर पर ललिता शास्त्री सभागार में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र की महत्ता इस बात से समझी जा सकती है कि उनके नाम से पहली बार हिंदी साहित्य के इतिहास में किसी युग का नामकरण हुआ। इसके पहले साहित्य-इतिहास के कालखंडों को प्रवृत्ति के आधार पर नामित किया जाता था।

हिंदी विभाग के प्रोफेसर जयशंकर तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी साहित्य की नींव हैं, पर यह नींव छुपी रहने वाली नहीं है। उन्होंने अपनी कविताओं, नाटकों, निबंधों और भाषणों से भारतीय जनमानस को आंदोलित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्यकारों की वर्तमान पीढ़ी अपने पितामह भारतेंदु से बहुत कुछ सीख सकती है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की निदेशक इतिहास विभाग की प्रोफेसर अमन चंद्रा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की और उपस्थित समस्त विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम हमारे मानस में स्थित सत्व-भाव को प्रस्फुटित करते हैं और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत शिक्षाप्रद होते हैं।
भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती पर आधारित संगोष्ठी की अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य इतिहास विभाग की प्रोफेसर वंदना सारस्वत ने की। उन्होंने सभी के प्रति साधुवाद व्यक्त किया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर रवीन्द्र कुमार ने मुख्य वक्ता प्रो. शैलेंद्र नाथ मिश्र को प्रभावशाली वक्तव्य के लिए और कार्यक्रम की संयोजक प्रोफेसर अमन चंद्रा के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ प्रतिभागिता किया। इस अवसर पर अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वीसीएच एनके श्रीनिवासा राव, संस्कृत विभाग के प्रोफेसर मंशाराम वर्मा, शिक्षाशास्त्र विभाग के प्रोफेसर शिव शरण शुक्ल, हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अच्युत शुक्ल, डॉ. मुक्ता टंडन सहित कई विद्यार्थी मौजूद रहें।
