बागपत। चुनाव में उतार-चढ़ाव खूब दिखाई देते है, लेकिन ऐसा शायद पहली बार हुआ कि आखिरी बूथ ने किसी प्रत्याशी को चुनाव में जीत दिलाई हो। बड़ौत सीट पर भाजपा को इसी तरह ही जीत मिली है। पूरी मतगणना में पीछे रहने के बाद आखिरी बूथ ने उसे जीत दिला दी। बागपत में जरूर कई बार उतार चढ़ाव आता रहा। कभी रालोद तो कभी भाजपा आगे होती रही। छपरौली में शुरूआत से रालोद का दबदबा रहा और हर बार बढ़त ज्यादा होती गई।
बड़ौत विधानसभा सीट की मतगणना शुरू हुई तो पहले ही राउंड में रालोद के जयवीर तोमर 298 वोट से आगे हो गए। उसके बाद बड़ौत में 24 राउंड हुए, लेकिन 23 राउंड तक जयवीर तोमर ने बढ़त बनाकर रखी। वह 23वें राउंड में 1611 वोट से आगे थे, लेकिन 24वां राउंड जयवीर तोमर को हार की तरफ लेकर चला गया। बूथ नंबर 997 ने भाजपा के केपी मलिक को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इस बूथ पर भाजपा के केपी मलिक को 649 तो जयवीर तोमर को केवल 29 वोट मिली। इसके बाद केपी मलिक 315 वोट से जीत गए।
बागपत सीट पर उतार चढ़ाव चलता रहा और मतगणना की शुरूआत होते ही रालोद के अहमद हमीद ने भाजपा के योगेश धामा को 4249 वोट से पीछे कर दिया था। योगेश धामा ने चौथे राउंड के बाद बढ़त बनाई तो वह नौवें राउंड के बाद फिर पीछे चले गए। उसके बाद वह आगे आए तो आखिर तक आगे रहकर जीत गए। छपरौली में रालोद के अजय कुमार पहले ही राउंड में आगे हो गए थे और वह 27 राउंड तक आगे ही रहे। भाजपा के सहेंद्र रमाला को उन्होंने कभी आगे नहीं निकलने दिया।
बड़ौत सीट पर दोबारा कराई बैलेट पेपर की गिनती
बड़ौत सीट पर जब हार-जीत का अंतर केवल 315 रहा तो रालोद नेताओं ने गड़बड़ी का आरोप लगाया। उसके बाद नियम के अनुसार प्रशासन ने बैलेट पेपर की गिनती दोबारा से कराई। उसके बाद भी रालोद के जयवीर सिंह नहीं जीत सके।
