नोएडा । सेक्टर 93-A में भ्रष्टाचार की नींव पर बनी ट्विन टावर को ध्वस्त कर दिया जाएगा, देश में पहली बार इतनी ऊंची बिल्डिंग को जमींदोज किया जाएगा। नियमों को ताक पर रखकर इस गगनचुंबी इमारत का निर्माण किया गया था। इस बिल्डिंग को बनाने वाले सुपरटेक बिल्डर के खिलाफ एमराल्ड कोर्ट के बायर्स ने अपने खर्च पर एक लंबी लड़ाई लड़ी। इसके बाद कोर्ट ने ट्विन टावर को गिराने का फैसला सुनाया था।
ट्विन टावर में सैकड़ों लोगों ने फ्लैट बुक कराए थे, इनमें से अभी भी कुछ लोगों को रिफंड नहीं मिला है। गिराने की प्रक्रिया के दौरान घरों को होने वाले संभावित नुकसान से लेकर विस्फोट से उड़ने वाली धूल तक हर कदम यहां के निवासियों के लिए खौफ के साए में रहने के समान है।
भ्रष्टाचार की इस गगनचुंबी इमारत के बनने की कहानी की शुरुआत करीब डेढ़ दशक पहले हुई थी। नोएडा के सेक्टर 93.। में सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के लिए जमीन आवंटन 23 नवंबर 2004 को हुआ था। इस प्रोजेक्ट के लिए नोएडा अथॉरिटी ने सुपरटेक को 84ए273 वर्गमीटर जमीन आवंटित की थी। 16 मार्च 2005 को इसकी लीज डीड हुई, लेकिन उस दौरान जमीन की पैमाइश में लापरवाही के कारण कई बार जमीन बढ़ी या घटी हुई भी निकल आती थी।
बात बिगड़नी शुरू तब हुई जब 28 फरवरी 2009 को उत्तर प्रदेश शासन ने नए आवंटियों के लिए एफएआर बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके साथ ही पुराने आवंटियों को कुल एफएआर का 33 प्रतिशत तक खरीदने का विकल्प भी दिया गया। एफएआर बढ़ने से अब उसी जमीन पर बिल्डर ज्यादा फ्लैट्स बना सकते थे। इससे सुपरटेक बिल्डर को बिल्डिंग की ऊंचाई 24 मंजिल और 73 मीटर तक बढ़ाने की अनुमति मिल गई।
यहां तक भी एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के बायर्स ने किसी तरह का विरोध नहीं किया, लेकिन बात तब बिगड़ी जब फिर से रिवाइज्ड प्लान में इसकी ऊंचाई 40 और 39 मंजिला करने के साथ ही 121 मीटर तक बढ़ाने की अनुमति मिली। इसके बाद एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के बायर्स ने विरोध करना शुरू कर दिया, क्योंकि नक्शे के हिसाब से आज जहां पर 32 मंजिला एपेक्स और सियाने खड़े हैं, वहां पर ग्रीन पार्क दिखाया गया था। इसके साथ ही यहां पर एक छोटी इमारत बनाने का भी प्रावधान किया गया।
